उपलब्धियां

सहकारिता विभाग, म.प्र. शासन की प्रमुख उपलब्धियां

आई.टी. :-

  • विभागीय न्यायालयों का समग्र कंप्यूटरीकरण एवं ऑनलाइन निर्णय की प्राप्ति 
  • सहकारी अधिकरण में प्रचिलित प्रकरणों की कॉज-लिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध 
  • सहकारी न्यायालयों में प्रचिलित प्रकरणों की कॉज-लिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध 
  • मुख्यालय में सितम्बर, 2016 से ई.एफ.टी.एस.(ऑनलाइन फाइल ट्रैकिंग सिस्टम) संचालित
  • विभाग में जनवरी 2017 से आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली का क्रियान्वयन 
  • सहकारी संस्थाओं के पंजीयन हेतु ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध 
  • वर्ष 2004 समाप्ति पर प्रदेश के 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में से मात्र 09 बैंकें संचित लाभ में राशि रु. 24.53 करोड़ से थीं। वर्ष 2016 की समाप्ति पर प्रदेश के 34 बैंक राशि रु. 257.88 करोड़ से संचित लाभ में है।
  • वर्ष 2004 समाप्ति पर 29 बैंक राशि रूपये 525.46 करोड़ की गम्भीर संचित हानि में थे। वर्ष 2016 की समाप्ति पर अब मात्र 04 बैंकें 113.32 करोड़ की संचित हानि में हैं।
    • वर्ष 2004 समाप्ति पर प्रदेश के 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में से मात्र 24 बैंकें रु. 36.90 करोड़ के वार्षिक लाभ में थी। वर्ष 2016 की समाप्ति पर प्रदेश के समस्त 33 बैंक राशि रु. 128.51 करोड़ के वार्षिक लाभ में है।
    • वर्ष 2004 की स्थिति पर अपेक्स बैंक रु. 69.13 करोड़ से संचित हानि में। मार्च 2016 की समाप्ति पर अपेक्स बैंक राशि रु. 57.99 करोड़ के संचित लाभ में।
  • बैंकिग रेग्यूलेशन एक्ट 1949 के अन्तर्गत धारा 11 के अनुपालन की स्थिति :- वर्ष 2004 समाप्ति पर प्रदेश की 38 जिला बैंकों में से 28 बैंक, बैंकिग रेग्यूलेशन एक्ट 1949 की धारा 11 के अन्तर्गत कमजोर बैंकों में वर्गीकृत। वर्ष 2016 की समाप्ति पर प्रदेश की 2 जिला बैंक अब धारा 11 में है। 
  • बैंकिंग लाईसेंस की स्थिति :- वर्ष 2004 समाप्ति पर प्रदेश की 38 जिला बैंकों में से मात्र 04 बैंकों के पास ही लाईसेंस था. प्रदेश की शीर्ष सहकारी बैंक के पास भी लाईसेंस नही था। वर्ष 2016 की समाप्ति पर शीर्ष बैंक सहित प्रदेश की सभी 38 जिला बैंकों के पास भारतीय रिजर्व बैंक से बैंकिंग लाईसेंस प्राप्त है।
  • कोर बैकिंग साल्यूशन :- शीर्ष बैंक एवं जिला सहकारी बैंकों की शाखाओं को मिलाते हुये समस्त 853 शाखाओं में सीबीएस प्लेट फार्म पर कार्य कर रही है | वर्तमान में शीर्ष बैंक एवं जिम सहकारी बैंक की समस्त शाखाओं के द्वारा एन.ई.एफ़.टी. एवं आर.टी.जी.एस. का कार्य किया जा रहा है |
  • एटीएम नेट वर्क स्थापना :- सहकारी बैंकों को व्यवसायिक बैंकों के एटीएम नेट वर्क से जोड़ने का कार्य दिसम्बर 2016 तक पूर्ण हो जावेगा।
  • शून्य प्रतिशत ब्याज दर :- वर्ष 2006-07 के पूर्व कृषकों से प्रभारित ब्याज दर 16 से 18 प्रतिशत तक हुआ करती थी जो कि वर्ष 2006-07 से कम होकर 7 प्रतिशत एवं 2008-09 में 5 प्रतिशत वर्ष 2010-11 में 3 प्रतिशत 2011-12 में 1 प्रतिशत एवं 2012-13 में 0 प्रतिशत कर दी गई है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड्स. :- वर्ष 2003-04 की समाप्ति पर म.प्र. के 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के द्वारा कुल 19,12,652 किसान के्रडिट कार्ड प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से जारी किये गये थे जिसके लिये कुल साख सीमा (एन.सी.एल.) रू. 3348.61 करोड स्वीकृत की गई थी। वर्षान्त 2015-16 की स्थिति पर 38 जिला सहकारी बैंकों द्वारा 5668707 किसान के्रडिट कार्ड जारी किये गये तथा इस हेतु स्वीकृत साख सीमा (एन.सी.एल.) रू. 20639.21 करोड थी। इस प्रकार इस अवधि में आधार वर्ष की तुलना में 200 प्रतिशत किसान क्रेडिट कार्ड जारी हुये तथा साख सीमाओं में 616 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित हुई है।
  • मध्यप्रदेश के किसानों को जीरो प्रतिशत की ब्याज दर पर अल्पकालीन कृषि ऋण:- वर्ष 2012-13 से सहकारी बैंकों से संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं द्वारा समयावधि में ऋण भुगतान करने वाले किसानों को अल्पावधि कृषि ऋण 0 (शून्य) प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा 6 प्रतिशत की दर से वर्ष 2012-13 में लगभग 30 लाख किसानों के लिए रूपये 328.12 करोड़ ब्याज अनुदान सहकारी संस्थाओं को उपलब्ध कराया गया है। वर्ष 2013-14 में ब्याज अनुदान हेतु राशि रूपये 328.27 करोड़, वर्ष 2014-15 में राशि रु. 742.30 करोड़, वर्ष 2015-16 में राशि रु. 871.96 करोड़ एवं वर्ष 2016-17 में राशि रु. 388.92 करोड़ कृषकों को उपलब्ध कराया गया |
कृषि ऋण, कृषि आदान (बीज - खाद), सार्वजनिक वितरण प्रणाली, समर्थन मूल्य पर उपार्जन आदि
रुपये करोड़ों में
क्रमांक विवरण अपेक्स बैंक सभी 38 डी सी सी बी
2003-04 2015-16 2003-04 2015-16
1 शेयर पूंजी 70.4 515.81 239.76 1117.02
2 सरकार के शेयर पूंजी 1.36 0 47.65 9.22
3 भंडार और अन्य फंड 231.43 904.80 943.59 3035.82
4 जमा 1508.83 5012.73 3658.65 13588.62
5 उधार 596.46 6148.30 1143.57 10033.81
6 ऋण और अभिभाषक. ओ/एस 1693.17 11765.04 3441.69 19155.25
7 निवेश 570.71 1581.88 3441.69 7184.27
8 कार्यशील पूंजी 2676.61 13060.18 5719.43 29442.24
9 वार्षिक लाभ (राशि) 1.84 56.09 36.9 128.51
10 बैंकों की संख्या लागू नहीं लागू नहीं 24 33
11 वार्षिक हानि(राशि) 0 0 72.02 74.65
12 बैंकों की संख्या लागू नहीं लागू नहीं 14 5
13 संचित लाभ (राशि) 0 57.99 24.53 257.88
14 बैंकों की संख्या लागू नहीं लागू नहीं 9 34
15 संचित हानि (राशि) 69.13 0 525.46 113.32
16 बैंकों की संख्या लागू नहीं लागू नहीं 29 4
17 वसूली का % ( अनुसूचित जनजाति के कृषि ऋण 30 जून ) 91.62 93.93 63.42 76
18 एनपीए का% 6.-9.42 4.15 28.87 14.12
19 धारा 11 का अनुपालन अनुपालन अनुपालन 10 36
20 जारी किये गए बैंकिंग लाइसेंस जारी नहीं किया जारी किया 4 38
  • फसल ऋण वितरण :- वर्ष 2003-04 में खरीफ एवं रबी मौसम में कुल 738.20 करोड नगद एवं 535.78 करोड वस्तु ऋण का वितरण किया गया था इस प्रकार वर्ष के दौरान कुल 1273.98 करोड अल्पावधि ऋण वितरित किया गया था, जबकि वर्ष 2015-16 में खरीफ एवं रबी फसलों के लिये नगद ऋण 10383.14 करोड तथा वस्तु ऋण रू. 3205.30 करोड इस प्रकार कुल 13588.44 करोड का ऋण वितरण किया गया । इस प्रकार आलोच्य अवधि में कुल अल्पावधि कृषि ऋण वितरण में 1067% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • ग्रामीण स्तर पर आधारभूत अधोसंरचनाओं का विकास :- सहकारी समितियों की भण्डारण क्षमता में वृद्धि के लिए समितियों में गोदाम निर्माण हेतु राज्य शासन के माध्यम से प्रदेश की 830 सहकारी समितियों को न्यूनतम 10 हजार वर्ग फीट भूमि निःशुल्क आवंटित की गई है। इस उपलब्ध कराई गई भूमि पर एनसीडीसी के सहयोग से 500 मैट्रिक टन क्षमता के प्रथम चरण में 60 एवं द्धितीय चरण में 60 गोदामों के निर्माण की कार्यवाही प्रारम्भ की गई है। इस परियोजना के साथ साथ राज्य शासन द्वारा 44 जिलों में मण्डी सहायता निधि से रूपये एक करोड़ की लागत से 100 स्थानों को चिन्हित कर मिनी मण्डी की अवधारणा के अनुरूप सहकारी समितियों को निःशुल्क अधोसंरचना निर्माण कर दिये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
  • एग्रीकल्चर मिनी मार्केट का निर्माण :- बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड क्षेत्र में म0प्र0 के 6 जिलों सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ एवं दतिया में चैपाल जैसी अवधारणा के अनुरुप कृषकों को एक ही छत के नीचे कृषि संबंधी समस्त सुविधायें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एग्रीकल्चर मिनी मार्केट की अवधारणा विकसित कर 27 अधोसंरचनाओं का निर्माण म0प्र0 वेयरहाउसिंग एण्ड लाॅजिस्टिक्स कार्पोरेशन म0प्र0 कृषि विपणन बोर्ड एवं म0प्र0 राज्य सहकारी विपणन संघ द्वारा किया गया है। मंडी बोर्ड द्वारा बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज फेस - 2 के अन्तर्गत एग्रीकल्चर मिनी मार्केट की अवधारणा विकसित कर 40 अधोसंरचनाओं का निर्माण विचाराधीन है।
  • रासायनिक खाद वितरण :- वर्ष 2003-04 के अंत में समितियों द्वारा वर्ष के दौरान जहां सिर्फ 778675 मी.टन. उर्वरकों का वितरण किया गया था वही पर वर्ष 2015-16 के दौरान समितियों द्वारा कृषकों को 26.80 लाख मेट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया |
  • समर्थन मूल्य पर उपार्जन :- प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने हेतु शासन समर्थन मूल्य खरीदी अंतर्गत वर्ष 2016-17 में गेहू उपार्जन 2957 केन्द्रों पर 5.33 लाख कृषकों से 39.92 लाख मेट्रिक टन राशि 6087 करोड़ की खरीद की गई तथा वर्ष 2016-17 में धान उपार्जन 918 केन्द्रों पर 2.87 लाख कृषकों से 19.61 लाख मेट्रिक टन राशी रु. 2883 करोड़ की खरीद की गई ।
  • सहकारी क्षेत्र में उचित मूल्य की दुकानें :- प्रदेश स्तर पर वर्ष 2003 में संचालित 18994 उचित मूल्य की दुकानों से 1159159.00 मे.टन खाद्यान्न वितरित किया गया, वह वर्ष 2013 में 295 प्रतिशत की वृद्धि होकर 21824 उचित मूल्य की दुकानों से 3253521.9 मे.टन खाद्यन्न वितरित हुआ।
  • एकीकृत सहकारी विकास परियोजना :- प्रदेश में 25 पूर्ण परियोजना के माध्यम से 259.72 करोड़ तथा वर्तमान में संचालित 12 परियोजनाओं के माध्यम से अभी तक राशि रू. 194.57 करोड़ इस प्रकार कुल राशि रू. 454.29 करोड़ की राशि उपलब्ध करायी गई है। प्रदेश में पूर्ण एवं संचालित परियोजनाओं के माध्यम से विभिन्न क्षमताओं के गोदाम निर्माण से लगभग 2.50 लाख मे.टन भण्डारण क्षमता विकसित।
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना :- 1000 मे.टन क्षमता के 80 गोदाम निर्माण की पूर्णता से 80 हजार मे.टन भण्डारण क्षमता विकसित।
  • भण्डारगृह निर्माण योजना :-500 मे.टन क्षमता के 66 गोदाम निर्माण की पूर्णता से 33 हजार मे.टन भण्डारण क्षमता विकसित।
  • टिशूकल्चर सहकारी सोसायटिया :- प्रदेश में नवीन क्षेत्रों में सहकारी समितियों का गठन किया गया है बुरहानपुर जिले में गन्ने एवं केले में टिशूकल्चर को बढ़ावा देने के लिये सहकारी समितिया गठित की गई है।
  • सहकारी क्षेत्र में बीज उत्पादन :- यह प्रदेश ऐसा पहला राज्य है जिसने बीज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए गत 10 वर्षो में बीज उत्पादक सहकारी समितिया गठित की है। अब तक लगभग 2523 प्राथमिक समितिया गठित की गयी है । बीज उत्पादन में सहकारिता का योगदान वर्ष 2016-17 में 1866.41 क्विंटल प्रजनक बीज प्रदेश के एवं अन्य राज्यों के कृषि विश्वविध्यालय एवं अनुसंधान केन्द्रों से प्रदेश की प्राथमिक बीज उत्पादक सहकारी संस्थाओ को उपलब्ध कराया गया है । प्रदेश में प्रमाणित बीजो के भण्डारण एवं कच्चे बीजो के भण्डारण हेतु म.प्र. राज्य बीज सहकारी संघ द्वारा 1000 मेट्रिक टन के 20 गोदाम सह ग्रेडिंग प्लांट के निर्माण की योजना के तहत् 6 का कार्य पूर्ण हो चूका है | 6 स्थानों पर कार्य पूर्णता की स्थिति में है तथा शेष पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है ।
  • सहकारी क्षेत्र में मत्स्य पालन :- वर्ष 2002-03 में प्रदेश में मत्स्य महासघ्ं के स्तर से कुल 1495 मे.टन मत्स्य उत्पादन किया जा रहा था। वर्तमान में वर्ष 2012-13 में यह बढ़कर 5147 मे.टन हो गया है जो तुलनात्मक 344 प्रतिशत अधिक है। सहकारी क्षेत्र में प्रदेश स्तर पर 2003 में 50818 मे.टन मत्स्य उत्पादन हो रहा था वह वर्ष 2013 में 167 प्रतिशत की वृद्धि होकर मत्स्य उत्पादन 85235 मे. टन हो गया है।
  • दुग्ध सहकारिता :- वर्ष 2003 में 2763 दुग्ध सहकारी समितियों द्वारा प्रतिदिन 2.92 लाख लीटर दुग्ध संकलन किया जा रहा था वह वर्ष 2016 में 6315 कार्यशील दुग्ध समितियों के माध्यम से 10.28 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध संकलन किया गया, वर्ष 2016-17 में 6698 समितियों के माध्यम से 8.74 लाख लीटर प्रतिदिन का संकलन किया जा रहा है |
  • सहकारी क्षेत्र में तेन्दू पत्ता संग्रहरण :- शीर्ष वनोपज संघ से संबंधित जिला युनियनों के अन्तर्गत वर्ष 2003 में कुल 1083 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों द्वारा 22 लाख मानक बोरा तेन्दू पत्ता संग्रहित किया जा रहा था । वर्ष 2013 में 1066 समितियों से माध्यम से 19.93 लाख मानक बोरा तेन्दू पत्ता संग्रहित किया गया । वर्ष 2014 में भारत में तेन्दू पत्ता के लिये अनुकूल मौसम नही होने के कारण 1067 समितियों द्वारा 16.99 लाख मानक बोरा संग्रहण किया गया है।
  • प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने हेतु दिनांक 25 जून 2013 को मध्य प्रदेश राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी की नियुक्ति की गई है।
  • प्रदेश के किसानों एवं सोसाइटी के सदस्यों को त्वरित न्याय प्रदान करने हेतु प्रथम चरण में वर्ष 2012-13 में दिनांक 14 मई 2012 को कार्यालय पंजीयक सहकारी संस्थाऐं, मध्य प्रदेश, भोपाल, सहकारिता विभाग के चार संभागीय एवं चार जिला मुख्यालयों (इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर) पर कुल 16 सहकारी न्यायालयों की पृथक व्यवस्था की गई।