परिचय

 लोकतांत्रिक साधन के रूप में पारस्परिक सहायता पर आधारित स्वैच्छिक सहकारी संस्थाओं को संगठित कर उनका विकास करने विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों के शोषण को रोकने और उनके सामाजिक आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने हेतु प्रदेश में विभिन्न स्तर पर विभिन्न प्रकार की सहकारी संस्थायें गठित की गई हैं। लोकतांत्रिक साधन और स्वयंसेवी तथा पारस्परिक सहायता पर आधारित जनतांत्रिक आधार पर सहकारी संस्थाओं को संगठित करने उनका विकास करने और जनता] विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों के शोषण को रोकने तथा उनके सामाजिक - आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने हेतु सहकारिता विधान का उद्देश्य परिभाषित किया गया है।

परस्पर सहयोग की भावना से संगठित तौर पर किये गये प्रयासों के फलस्वरूप सदस्य न सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं] अपितु एक दूसरे की आर्थिक उन्नति में भी सक्रिय योगदान दे सकते है। इन्हीं उदेश्यों की पूर्ति हेतु प्रदेश में सहकारिता के विकास एवं संवर्धन हेतु सतत् प्रयास किये गये है। सहकारिता विभाग विभिन्न प्रकार की सहकारी संस्थाओं को आवश्यक मार्गदर्शन] संरक्षण एवं आर्थिक तथा तकनीकी सुविधा जैसे अंशपूजी] ऋण] ऋण गारन्टी तथा अनुदान आदि सुलभ कराता है। इस पृष्ठभूमि के साथ वर्तमान अर्थ व्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र अपनी भूमिका का निर्वहन आर्थिक एवं सामाजिक उन्नयन में सक्षमता के साथ कर रही हैं। परिणामस्वरूप सहकारी संस्थायें उनसे जुडे समाज के अत्यंत पिछडे़ समुदाय एवं महिलाओं को अपने माध्यम से दायित्वों को निभाते हुए तथा आर्थिक उत्थान को केन्द्र बिन्दु में रखकर सामाजिक समानता प्राप्त करने के महत्वपूर्ण साधन के रूप में स्वयं को स्थापित करता जा रहा है।

सहकारिता विभाग शासन के अन्य विभागों से भिन्न होकर एक नियामक एवं सहकारी आन्दोलन में कार्यरत सहकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित करने वाला विकास विभाग है। सहकारिता विभाग सीधे धनराशि व्यय करने वाला विभाग नहीं है वरन् यह विकास से जुडी सहकारी संस्थाओं का पर्यवेक्षक एवं नियामक विभाग हैं] जिसका दायित्व संस्थाओं का गठन] पंजीयन] पर्यवेक्षण] अंकेक्षण] निरीक्षण] परिसमापन एवं सुदृढीकरण का है। सहकारिता वास्तव में लोकतांत्रिक साधन का एक ऐसा प्रारूप है जो पारस्परिक सहायता पर आधारित बैंकिंग संस्थाओं और स्वैच्छिक सहकारी संस्थाओं को संगठित कर उनका संस्थागत विकास करता है] ताकि वे सामान्यजन] विशेष रूप से कमजोर वर्गों के शोषण को रोकने और उनके सामाजिक व आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने का माध्यम बन सके। यह विभाग प्रदेश के किसानों] कारीगरों] बुनकरों] मछुआरों] अनुसूचित जाति] अनुसूचित जनजाति] अन्य पिछडा वर्गों] महिलाओं तथा अन्य कमजोर वर्गों के व्यक्तियों की सहकारी संस्थाओं के लिये विभाग की भूमिका एक मित्र] दार्शनिक एवं मार्गदर्शक के रूप में निभाता है ताकि उनकी सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति प्राप्त की जा सके।

वैद्यनाथन कमेटी की अनुशंसाओं के आधार पर मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटीज अधिनियम में व्यापक संशोधन किए जाकर कृषि साख सहकारी संरचना को सशक्त व्यवसायिक आधार प्रदान किया गया हैं।

सहकारिता विभाग का मुख्य आधार सहकारी संस्थाएं एवं सहकारिताऐं है। वर्तमान में इनके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लोकोपयोगी कार्य किये जा रहे हैं। प्रदेश में सहकारिता के सहकारी आंदोलन ने अपनी अनेक कमियों के बावजूद समाज में विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछडे़] दलित और शोषित कमजोर वर्गों के सर्वांगीण विकास के हित में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा गांव-गांव में सहकारी साख सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। सहकारी संस्थाओं ने कृषि उत्पादन, उत्तम खाद] उन्नत बीज] कीटनाशक वितरण] सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खाद्यान्न वितरण] समर्थन मूल्य पर कृषि उपज खरीद] उपभोक्ता] आवास] मत्स्य डेयरी] बुनकर खनिज] वनोपज] बीज उत्पादन] शिक्षा प्रशिक्षण तथा औद्यौगिक इकाईयों के निर्माण एवं संचालन के लिए संकल्पित है।

  1. गृह निर्माण
  2. अल्पकालीन सहकारी साख संरचना
  3. एकीकृत सहकारी विकास परियोजनाऐं

1. गृह निर्माण

1.1. सहकारिता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ तथा लगभग 3000 प्राथमिक गृह निर्माण सहकारी समितियां सम्पूर्ण प्रदेश में मध्यम एवं निम्न वर्गों के लोंगो की आवास समस्या को हल करने की दिशा में कार्यरत है मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ द्वारा अपने कालातीत ऋणों की वसूली हेतु मध्यप्रदेश शासन सहकारिता विभाग द्वारा अनुमोदित एकमुश्त समझौता योजना के अंतर्गत कालातीत ऋणी सदस्यों को समझौता दिनांक पर देय सम्पूर्ण दण्ड व्याज एवं गत ५ वर्षो के व्यवहारिक व्याज की छूट प्रदान की जा रही है यह योजना ३१ मार्च २०१३ तक प्रभाव शील हैं आवास संघ द्वारा योजना की अवधि में दो वर्ष की वृद्धि (अर्थात ३१ मार्च २०१५ तक ) हेतु प्रस्ताव पंजीयक कार्यालय को प्रेषित किया गया है जो प्रक्रियाधीन है

1.2. गृह निर्माण समितियों को अपने कार्य में होने वाली कठिनाइयों एवं उनके निराकरण करने के लिए उद्देश्य के बेहतर व्यवस्थापन से इन समितियों के लिए मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम में प्रथक से याक अध्याय बनाया गया हैं जो दिनांक ३१/०४/२००४ से प्रभावशील हैं इसमें सदस्यों के हितो की सुरक्षा के विशेष प्रावधान किये गए हैं वर्तमान में गृह निर्माण समितियों में हो रही अनियमितताओ को द्रष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम की धरा ७२ में गृह निर्माण सहकारी समितियों के पदाधिकारियों के द्वारा की जाने वाली अनियमितताओ के लिए दण्ड बढाया जाकर अब ५ लाख रुपये तक जुर्माना तथा ३ वर्ष तक कारावास कर दिया गया है इसी कड़ी में गृह निर्माण सहकारी संस्थाओ की उपविधियों में संशोधन कर संस्था के सदस्य को ०३ वर्ष पश्चात भूखंड हस्तांतरण की अनुमति दी गई तथा सदस्य के भूखंड पर भवन निर्माण की अवधि ०५ वर्ष के स्थान पर ०८ वर्ष कर दी गई है जिससे सदस्य को संचालक मंडल द्वारा अनावश्यक परेशां करने से बचाया गया है

1.3. प्रदेश में गृह निर्माण सहकारी संस्थाओ के सदस्यों द्वारा वरीयता में होने तथा राशि जमा करने के उपरांत भी भूखंड नहीं मिलने, जमा राशि वापस नहीं मिलने, रजिस्ट्री उपरांत भूखंड का कब्ज़ा नहीं मिलने आदि शिकायते प्राप्त होने पर शासन द्वारा जांच कराई गई परिणामस्वरुप गत दो वर्षो में ४४०० पीड़ित सदस्यों को भूखंड तथा ११०० पीड़ित सदस्यों को उनकी जमा राशि व्याज सहित रुपये ४.१८ करोड़ वापस कराई गई है

2. अल्पकालीन सहकारी साख संरचना

मध्य प्रदेश में अल्पकालीन सहकारी साख संरचना :-

संस्था संख्या शाखाऐं संपादित किये जा रहे कार्य
म.प्र. राज्य सहकारी बैंक 1 20 कृषि ऋण, कृषि आदान (बीज - खाद), सार्वजनिक वितरण प्रणाली, समर्थन मूल्य पर उपार्जन आदि
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक 38 807
प्राथमिक कृषि साख समितिया प्राथमिक कृषि साख समितिया ...

3. एकीकृत सहकारी विकास परियोजनाऐं

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा कृषि, उद्योग, प्रक्रिया, विपणन और उपभोक्ता क्षेत्रों में विकास के लिये योजनाऐं संचालित की जा रही है। इनमें वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण योजना एकीकृत सहकारी विकास परियोजना है, जो वर्तमान में प्रदेश के निम्नानुसार जिलों में संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित मदों के लिये सहायता उपलब्ध कराई जा रही हैः-

क्रमांक मद उपलब्ध सहायता
01 प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थायें बैकिंग काउंटर, गोदाम मरम्मत, नवीन गोदाम निर्माण, मार्जिन मनी।
02 विपणन समिति नवीन गोदाम, मार्किटयार्ड, ट्रक, टेंकर मार्जिन मनी, गोदाम मरम्मत
03 बगवानी हिस्सापूंजी, मिर्च प्रक्रिया
04 मत्स्य पालन हिस्सापूंजी, जाल किश्ती, बीज साईकिल
05 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बैंकिंग काउंटन, हिस्सापूंजी, सेप्टीलाकर
06 हाथकरघा (बुनकर) हिस्सापूंजी, गोदाम निर्माण, शोरूम, लूम्स एवं एसेसरीज
07 डेयरी हिस्सापूंजी, मिल्ककेन, दुग्ध संग्रह केन्द्र, पशुआहार, गोदाम,मिनीटेंकर, चलित मिल्क बूथ
08 वनोपज, रेशम उदवहन, सिंचाई, परियोजना तथा महिला सोसायटीज अंशपूंजी एवं अन्य वित्तीय सहायता
09 मानव संसाधन विकास पी.आई.टी.कास्ट, प्रशिक्षण प्रोत्साहन, परियोजना रिपोर्ट विशेष प्रशिक्षण सहायता का स्वरूप