सहकारिता विभाग, मध्य प्रदेश सरकार

विभागीय जानकारी

 लोकतांत्रिक साधन के रूप में पारस्परिक सहायता पर आधारित स्वैच्छिक सहकारी संस्थाओं को संगठित कर उनका विकास करने विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों के शोषण को रोकने और उनके सामाजिक आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने हेतु प्रदेश में विभिन्न स्तर पर विभिन्न प्रकार की सहकारी संस्थायें गठित की गई हैं। लोकतांत्रिक साधन और स्वयंसेवी तथा पारस्परिक सहायता पर आधारित जनतांत्रिक आधार पर सहकारी संस्थाओं को संगठित करने उनका विकास करने और जनता, विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों के शोषण को रोकने तथा उनके सामाजिक - आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने हेतु सहकारिता विधान का उद्देश्य परिभाषित किया गया है।

परस्पर सहयोग की भावना से संगठित तौर पर किये गये प्रयासों के फलस्वरूप सदस्य न सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं| एक दूसरे की आर्थिक उन्नति में भी सक्रिय योगदान दे सकते है। इन्हीं उदेश्यों की पूर्ति हेतु प्रदेश में सहकारिता के विकास एवं संवर्धन हेतु सतत् प्रयास किये गये है। सहकारिता विभाग विभिन्न प्रकार की सहकारी संस्थाओं को आवश्यक मार्गदर्शन, संरक्षण एवं आर्थिक तथा तकनीकी सुविधा जैसे अंशपूजी, ऋण, ऋण गारन्टी तथा अनुदान आदि सुलभ कराता है। इस पृष्ठभूमि के साथ वर्तमान अर्थ व्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र अपनी भूमिका का निर्वहन आर्थिक एवं सामाजिक उन्नयन में सक्षमता के साथ कर रही हैं। परिणामस्वरूप सहकारी संस्थायें उनसे जुडे समाज के अत्यंत पिछडे़ समुदाय एवं महिलाओं को अपने माध्यम से दायित्वों को निभाते हुए तथा आर्थिक उत्थान को केन्द्र बिन्दु में रखकर सामाजिक समानता प्राप्त करने के महत्वपूर्ण साधन के रूप में स्वयं को स्थापित करता जा रहा है।

उपलब्धियां

सहकारिता विभाग, म.प्र. शासन की प्रमुख उपलब्धियां

आई.टी. :-

  • विभागीय न्यायालयों का समग्र कंप्यूटरीकरण एवं ऑनलाइन निर्णय की प्राप्ति 
  • सहकारी अधिकरण में प्रचिलित प्रकरणों की कॉज-लिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध 
  • सहकारी न्यायालयों में प्रचिलित प्रकरणों की कॉज-लिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध 
  • मुख्यालय में सितम्बर, 2016 से ई.एफ.टी.एस.(ऑनलाइन फाइल ट्रैकिंग सिस्टम) संचालित
  • विभाग में जनवरी 2017 से आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली का क्रियान्वयन 
  • सहकारी संस्थाओं के पंजीयन हेतु ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध 
  • वर्ष 2004 समाप्ति पर प्रदेश के 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में से मात्र 09 बैंकें संचित लाभ में राशि रु. 24.53 करोड़ से थीं। वर्ष 2016 की समाप्ति पर प्रदेश के 34 बैंक राशि रु.

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